सड़ीया देखाके बहकवलस मिजाजवा
बजाजवा ये सखी ! मार लिहलस माजवा
हथवा प हाथ धके कपडा देखवलस
नापे के बहाने हाथ पीठ प फिरवलस
छू लिहलस जोबन हमार सट के उ पांजवा
बजाजवा ये सखी ! मार लिहलस माजवा
मीठी-मीठी बात करके बात में फंसइलस
सड़िया उधार देके पइसो ना लिहलस
सुध-मूढ़ जोड़ के उ लिहलस बेयाजवा
बजाजवा ये सखी ! मार लिहलस माजवा
जाने नाही पवनी हम ओकरो इरादा
चोलिया निहार के लगावत रहे पाता
देखले मुकेश जी त भइलें नाराजवा
बजाजवा ये सखी ! मार लिहलस माजवा

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