बुधवार, 28 सितंबर 2016

बजाजवा ये सखी ! मार लिहलस माजवा || || भोजपुरी लोकगीत || डॉ .मुकेश पाण्डेय

सड़ीया देखाके बहकवलस  मिजाजवा 
बजाजवा ये सखी ! मार लिहलस माजवा 


हथवा प हाथ धके कपडा देखवलस 
नापे के बहाने हाथ पीठ प फिरवलस 
छू लिहलस जोबन हमार सट  के उ पांजवा 
बजाजवा ये सखी ! मार लिहलस माजवा 

Dr.Mukesh Pandey

मीठी-मीठी बात करके बात में फंसइलस 
सड़िया  उधार देके पइसो  ना लिहलस 
सुध-मूढ़ जोड़ के उ लिहलस बेयाजवा 
बजाजवा ये सखी ! मार लिहलस माजवा 


 जाने नाही पवनी हम ओकरो इरादा 
चोलिया  निहार के लगावत रहे पाता 
देखले मुकेश जी त भइलें नाराजवा 
बजाजवा ये सखी ! मार लिहलस माजवा 


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