धड़कता धक्-धक् छतिया
ये सइयाँ सरकाव ना खटिया
संघवे सुताव सारी रतिया
ये सइयाँ सरकाव ना खटिया
केहू नईखे घर में ना अहरा ना बहरा
मौक़ा अइसन मिली ना फेरु सुनहरा
क ल ना मीठी-मीठी बतिया
ये सइयाँ सरकाव ना खटिया
जइसे मन करे जवनिया से खेल
भर अँकवारी चाहे कोरवा में ले ल
हमसे निभाव पिरितिया
ये सइयाँ सरकाव ना खटिया
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें