शुक्रवार, 30 सितंबर 2016

छठ घाटे छोड़ेम छुड़छुड़ी पड़ाका ॥ भोजपुरी छठ गीत ॥ डॉ मुकेश पाण्डेय

छठ घाटे छोड़ेम  छुड़छुड़ी पड़ाका  ,अउरी अकशिया बम


अबकी त  हार जइहें हमरा से काका
एक से एक हम करेम  धमाका
ख़ाली ते पापा से पइसा  मंगादे  ,कहल करेम हरदम
बानी हम केकरा से कम ,ये माई रे


करेम धमाका दिल खोली गांव भर में
सोचूं तनी हम्ही  एगो लईका बानी घर में
सभे सेयान बाटे  करे मनमानी ,दम अब हम ना  धरम
बानी हम केकरा से कम ,ये माई रे  


पाण्डेय मुकेश भईया हँसे नाही पावस
हमरो से कमे पड़ाका उड़ावस
पापा के संघे जाई बजरिया , सुपर पड़ाका ख़रीदम    
बानी हम केकरा से कम ,ये माई रे  

बुधवार, 28 सितंबर 2016

जवानी में तनिका हेल्फ़ कर ना || भोजपुरी लोकगीत || डॉ .मुकेश पाण्डेय

हेल्फ़ कर ना ये देवरु हेल्फ़ कर ना 
पिया बहरा बाड़ें मार द ना सेल्फ़ 
जवानी में तनिका हेल्फ़ कर ना 

पियऊ  कमाए ख़ातिर गईलें राजधानी में 
लागताटे मुरचा हमरा चढ़ली जवानी में 
यूज़ कईला बिना बिगड़ता हेल्थ 
जवानी में तनिका हेल्फ़ कर ना 


ढेर दिन से लागल नईखे इंजन में चाभी 
धइले -धईल लागे कुछु हो जाई ख़राबी 
माटी मिले तहरा भईया के वेल्थ 
जवानी में तनिका हेल्फ़ कर ना 



तहरे घर के इज़्ज़त हवे तू  ही अब सम्हार ल 
हमरो के दे द मज़ा तू हु माजा मार ल 
खोली द ना चोलिया के बेल्ट 
जवानी में तनिका हेल्फ़ कर ना 


ये सइयाँ सरकाव ना खटिया || भोजपुरी लोकगीत || डॉ .मुकेश पाण्डेय

धड़कता धक्-धक् छतिया 
ये सइयाँ  सरकाव ना खटिया 
संघवे सुताव सारी रतिया 
ये सइयाँ  सरकाव ना खटिया 

केहू नईखे घर में ना अहरा ना बहरा 
मौक़ा अइसन मिली ना फेरु सुनहरा 
क ल ना मीठी-मीठी बतिया 
ये सइयाँ  सरकाव ना खटिया 

जइसे मन करे जवनिया से खेल 
भर अँकवारी चाहे कोरवा में ले ल 
हमसे निभाव पिरितिया 
ये सइयाँ  सरकाव ना खटिया 

दिन के अवसान भईल || भोजपुरी लोकगीत || डॉ .मुकेश पाण्डेय

सूरज डूब गईल सागर में 
जग सुनसान भईल 
दिन के अवसान भईल 

संझवत के बेरा पूजा कर 
दीया बार तुलसी चउरा पर 
जगमग प्राण भईल 
दिन के अवसान भईल 
डॉ मुकेश पाण्डेय 

अँखियन के सीपी से झर -झर 
मोती छिटा गईल अम्बर पर 
दूधिया चान  भईल 
दिन के अवसान भईल 

हियरा में इक्षा के गठरी 
धर के सुतल सउँसे नगरी 
स्वप्न सयान भइल 
दिन के अवसान भईल 

बजाजवा ये सखी ! मार लिहलस माजवा || || भोजपुरी लोकगीत || डॉ .मुकेश पाण्डेय

सड़ीया देखाके बहकवलस  मिजाजवा 
बजाजवा ये सखी ! मार लिहलस माजवा 


हथवा प हाथ धके कपडा देखवलस 
नापे के बहाने हाथ पीठ प फिरवलस 
छू लिहलस जोबन हमार सट  के उ पांजवा 
बजाजवा ये सखी ! मार लिहलस माजवा 

Dr.Mukesh Pandey

मीठी-मीठी बात करके बात में फंसइलस 
सड़िया  उधार देके पइसो  ना लिहलस 
सुध-मूढ़ जोड़ के उ लिहलस बेयाजवा 
बजाजवा ये सखी ! मार लिहलस माजवा 


 जाने नाही पवनी हम ओकरो इरादा 
चोलिया  निहार के लगावत रहे पाता 
देखले मुकेश जी त भइलें नाराजवा 
बजाजवा ये सखी ! मार लिहलस माजवा 


अभिले सइयाँ ना आयो रे || भोजपुरी लोकगीत || डॉ मुकेश पाण्डेय

अभिले  सइयाँ  ना आयो रे 
कवन रुपइया  कमायो रे 
हमरा उनका से दूर भईले  , बीतल  महीना कई साल 
हमार  सइयां  ना अईले रे  ,     हो गईल हमरो  बुरा हाल 
Dr.Mukesh Pandey


अंगूरी प गिनी - गिनी मारीं  अरमान के 
गईनी दुवारे हम त  कतना  भगवान  के 
नाता जे हमसे  छोड़ायो  रे , 
जीते-जी हम मर जाओ रे 
हमके अतना सतइलें  रे , हमार धँसल बा देख दुनु गाल 
हमार  सइयां  ना अईले रे  ,      हो गईल हमरो  बुरा हाल 


रोज़  दरवाज़ा खोलीं ,हम त  इतराई 
मन में बसाईं हमार सईया  आजु आई 
खाना -पीना कुछ ना खायो रे 
उनके फ़िकिर दुबरायो    रे
काहे अतना रोवइलें  रे , भईल बा भीख़ईन  के हाल 
हमार  सइयां  ना अईले रे  ,      हो गईल हमरो  बुरा हाल