ये रजऊ हो ले ले अईह चुनरिया
आईल नवरात घरे अइहें मयरिया
लाले चटकार रंग जन तू भुलईहा
जाई के दरजीया से गोटा लगवईह
मूंगा अउर मोती जड़वईह अचरिया
ये रजऊ हो ले ले अईह चुनरिया
पंडित जी के पुतवा बोलाके राखब कलशा
नव दिन नवमी में कराईब हम जलसा
कोहरा के लइह कलशा दियरिया
ये रजऊ हो ले ले अईह चुनरिया
देखी सेवा भाव माई खुश होइ जइहें
अन्न धन अपना अंगना बरसइहें
पांडेय मुकेश प माई फेरिहें नज़रिया
ये रजऊ हो ले ले अईह चुनरिया